उलझनें है बहुत और रास्ता कोई सूझता नही, ज़िंदगी की अनगिनत पहेलियाँ हैं पर हल कोई बूझता नही. अंतर्द्वंद है खुद से खुद का, और जंग कोई जीतता नही. निगाह में है मंज़िल, लेकिन डगर कोई दिखती नही, दिखती है अगर डगर, तो सोच कोई टिकती नही. अंतर्द्वंद है, खुद से खुद का, और जंग कोई जीतता नही. कुछ बदलने की कोशिश है,पर ढीठ हैं हालात, कुछ बदलता मैं नही और कुछ यह बदलते नही अंतर्द्वंद है, खुद से खुद का, और जंग कोई जीतता नही.
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